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सहीह मुस्लिम

नंबर 6624

नंबर 6624किताब 45, नंबर 122अरबी नंबरिंग 2601.07
حَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، وَعَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ، قَالَ زُهَيْرٌ حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، حَدَّثَنَا ابْنُ أَخِي ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ عَمِّهِ، حَدَّثَنِي سَعِيدُ بْنُ الْمُسَيَّبِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّهُ قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ اللَّهُمَّ إِنِّي اتَّخَذْتُ عِنْدَكَ عَهْدًا لَنْ تُخْلِفَنِيهِ فَأَيُّمَا مُؤْمِنٍ سَبَبْتُهُ أَوْ جَلَدْتُهُ فَاجْعَلْ ذَلِكَ كَفَّارَةً لَهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:I have held covenant with Thee which Thou wouldst not break, so for any believer whom I curse or beat, make that an expiation on the Day of Resurrection

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 45 · The Book of Virtue, Enjoining Good Manners, and Joining of the Ties of Kinship

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।