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सहीह मुस्लिम

नंबर 6597

नंबर 6597किताब 45, नंबर 95अरबी नंबरिंग 2591.02
حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، وَعَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ، كِلاَهُمَا عَنْ عَبْدِ الرَّزَّاقِ، أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ، عَنِ ابْنِ الْمُنْكَدِرِ، فِي هَذَا الإِسْنَادِ ‏.‏ مِثْلَ مَعْنَاهُ غَيْرَ أَنَّهُ قَالَ ‏ "‏ بِئْسَ أَخُو الْقَوْمِ وَابْنُ الْعَشِيرَةِ ‏"‏ ‏.‏
This hadith has been reported on the authority of Ibn Munkadir with the same chain of transmitters but with a slight variation of wording

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 45 · The Book of Virtue, Enjoining Good Manners, and Joining of the Ties of Kinship

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।