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सहीह मुस्लिम

नंबर 6574

नंबर 6574किताब 45, नंबर 72अरबी नंबरिंग 2577.03
قَالَ أَبُو إِسْحَاقَ حَدَّثَنَا بِهَذَا الْحَدِيثِ الْحَسَنُ، وَالْحُسَيْنُ، ابْنَا بِشْرٍ وَمُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى قَالُوا حَدَّثَنَا أَبُو مُسْهِرٍ، ‏.‏ فَذَكَرُوا الْحَدِيثَ بِطُولِهِ ‏.‏
This hadith is also transmitted through Ibna Bashr and Muhammad bin Muhammad through Abu Mashur through the same chain, narrated to its (full) extent

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 45 · The Book of Virtue, Enjoining Good Manners, and Joining of the Ties of Kinship

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।