सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 6567

नंबर 6567किताब 45, नंबर 65अरबी नंबरिंग 2572.07
حَدَّثَنِي حَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى، أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنَا حَيْوَةُ، حَدَّثَنَا ابْنُ الْهَادِ، عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ حَزْمٍ، عَنْ عَمْرَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ مَا مِنْ شَىْءٍ يُصِيبُ الْمُؤْمِنَ حَتَّى الشَّوْكَةِ تُصِيبُهُ إِلاَّ كَتَبَ اللَّهُ لَهُ بِهَا حَسَنَةً أَوْ حُطَّتْ عَنْهُ بِهَا خَطِيئَةٌ ‏"‏ ‏.‏
A'isha reported:I heard Allah's Messenger (ﷺ) as saying: There is nothing (in the form of trouble) that comes to a believer even if it is the pricking of a thorn that there is decreed for him by Allah good or his sins are obliterated

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 45 · The Book of Virtue, Enjoining Good Manners, and Joining of the Ties of Kinship

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।