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सहीह मुस्लिम

नंबर 6560

नंबर 6560किताब 45, नंबर 58अरबी नंबरिंग 2571.02
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَأَبُو كُرَيْبٍ قَالاَ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، ح وَحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، ح وَحَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، أَخْبَرَنَا عِيسَى بْنُ يُونُسَ، وَيَحْيَى بْنُ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ أَبِي غَنِيَّةَ، كُلُّهُمْ عَنِ الأَعْمَشِ، بِإِسْنَادِ جَرِيرٍ ‏.‏ نَحْوَ حَدِيثِهِ وَزَادَ فِي حَدِيثِ أَبِي مُعَاوِيَةَ قَالَ ‏ "‏ نَعَمْ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ مَا عَلَى الأَرْضِ مُسْلِمٌ ‏"‏ ‏.‏
This hadith has been transmitted on the authority of jarir and the hadith transmitted on the authority of Abu Mu'awiya there is an addition of these words:He said: Yes, by Him in Whose Hand is my life, there is no Muslim upon the earth." The rest of the hadith is the same

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 45 · The Book of Virtue, Enjoining Good Manners, and Joining of the Ties of Kinship

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।