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सहीह मुस्लिम

नंबर 6548

नंबर 6548किताब 45, नंबर 46अरबी नंबरिंग 2566
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، عَنْ مَالِكِ بْنِ أَنَسٍ، فِيمَا قُرِئَ عَلَيْهِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ، الرَّحْمَنِ بْنِ مَعْمَرٍ عَنْ أَبِي الْحُبَابِ، سَعِيدِ بْنِ يَسَارٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِنَّ اللَّهَ يَقُولُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ أَيْنَ الْمُتَحَابُّونَ بِجَلاَلِي الْيَوْمَ أُظِلُّهُمْ فِي ظِلِّي يَوْمَ لاَ ظِلَّ إِلاَّ ظِلِّي ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:Verily. Allah would say on the Day of Resurrection: Where are those who have mutual love for My Glory's sake? Today I shall shelter them in My shadow when there is no other shadow but the shadow of Mine

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 45 · The Book of Virtue, Enjoining Good Manners, and Joining of the Ties of Kinship

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।