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सहीह मुस्लिम

नंबर 6531

नंबर 6531किताब 45, नंबर 28अरबी नंबरिंग 2559.02
حَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، وَابْنُ أَبِي عُمَرَ، وَعَمْرٌو النَّاقِدُ، جَمِيعًا عَنِ ابْنِ عُيَيْنَةَ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، بِهَذَا الإِسْنَادِ وَزَادَ ابْنُ عُيَيْنَةَ ‏ "‏ وَلاَ تَقَاطَعُوا ‏"‏ ‏.‏
This hadith has been narrated on the authority of Zuhri with the same chain of transmitters with the addition of Ibn Uyaina (and the words are):" Do not cut off (mutual relations)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 45 · The Book of Virtue, Enjoining Good Manners, and Joining of the Ties of Kinship

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।