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सहीह मुस्लिम

नंबर 6511

नंबर 6511किताब 45, नंबर 11अरबी नंबरिंग 2551.02
حَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنْ سُهَيْلٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ رَغِمَ أَنْفُهُ ثُمَّ رَغِمَ أَنْفُهُ ثُمَّ رَغِمَ أَنْفُهُ ‏"‏ ‏.‏ قِيلَ مَنْ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ ‏"‏ مَنْ أَدْرَكَ وَالِدَيْهِ عِنْدَ الْكِبَرِ أَحَدَهُمَا أَوْ كِلَيْهِمَا ثُمَّ لَمْ يَدْخُلِ الْجَنَّةَ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:Let him be humbled, let him be humbled. It was said: Allah's Messenger, who is he? He said. He who finds his parents in old age, either one or both of them, and does not enter Paradise

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 45 · The Book of Virtue, Enjoining Good Manners, and Joining of the Ties of Kinship

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।