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सहीह मुस्लिम

नंबर 6501

नंबर 6501किताब 45, नंबर 2अरबी नंबरिंग 2548.02
حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلاَءِ الْهَمْدَانِيُّ حَدَّثَنَا ابْنُ فُضَيْلٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عُمَارَةَ، بْنِ الْقَعْقَاعِ عَنْ أَبِي زُرْعَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَجُلٌ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَنْ أَحَقُّ بِحُسْنِ الصُّحْبَةِ قَالَ ‏ "‏ أُمُّكَ ثُمَّ أُمُّكَ ثُمَّ أُمُّكَ ثُمَّ أَبُوكَ ثُمَّ أَدْنَاكَ أَدْنَاكَ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported that a person said:Allah's Messenger, who amongst the people is most deserving of my good treatment? He said: Your mother, again your mother, again your mother, then your father, then your nearest relatives according to the order (of nearness)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 45 · The Book of Virtue, Enjoining Good Manners, and Joining of the Ties of Kinship

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।