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सहीह मुस्लिम

नंबर 6497

नंबर 6497किताब 44, नंबर 326अरबी नंबरिंग 2546.01
حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، وَعَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ، قَالَ عَبْدٌ أَخْبَرَنَا وَقَالَ ابْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ، عَنْ جَعْفَرٍ الْجَزَرِيِّ، عَنِ يَزِيدَ بْنِ الأَصَمِّ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لَوْ كَانَ الدِّينُ عِنْدَ الثُّرَيَّا لَذَهَبَ بِهِ رَجُلٌ مِنْ فَارِسَ - أَوْ قَالَ مِنْ أَبْنَاءِ فَارِسَ - حَتَّى يَتَنَاوَلَهُ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:If the din were at the Pleiades, even then a person from Persia would have taken hold of it, or one amongst the Persian descent would have surely found it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of the Merits of the Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।