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सहीह मुस्लिम

नंबर 6481

नंबर 6481किताब 44, नंबर 310अरबी नंबरिंग 2538.01
حَدَّثَنِي هَارُونُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، وَحَجَّاجُ بْنُ الشَّاعِرِ، قَالاَ حَدَّثَنَا حَجَّاجُ بْنُ مُحَمَّدٍ، قَالَ قَالَ ابْنُ جُرَيْجٍ أَخْبَرَنِي أَبُو الزُّبَيْرِ، أَنَّهُ سَمِعَ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ، يَقُولُ سَمِعْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ قَبْلَ أَنْ يَمُوتَ بِشَهْرٍ ‏ "‏ تَسْأَلُونِي عَنِ السَّاعَةِ وَإِنَّمَا عِلْمُهَا عِنْدَ اللَّهِ وَأُقْسِمُ بِاللَّهِ مَا عَلَى الأَرْضِ مِنْ نَفْسٍ مَنْفُوسَةٍ تَأْتِي عَلَيْهَا مِائَةُ سَنَةٍ ‏"‏ ‏.‏
Jabir b. 'Abdullah reported:I heard Allah's Messenger (ﷺ) as saying this one month before his death: You asked me about the Last Hour whereas its knowledge is with Allah. I, however, take an oath and say that none upon the earth, the created beings (from amongst my Companions), would survive at the end of one hundred years

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of the Merits of the Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।