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सहीह मुस्लिम

नंबर 6464

नंबर 6464किताब 44, नंबर 293अरबी नंबरिंग 2529.02
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَمُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا عَبْدَةُ بْنُ، سُلَيْمَانَ عَنْ عَاصِمٍ، عَنْ أَنَسٍ، قَالَ حَالَفَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بَيْنَ قُرَيْشٍ وَالأَنْصَارِ فِي دَارِهِ الَّتِي بِالْمَدِينَةِ ‏.‏
Anas reported Allah's Messenger (ﷺ) established fraternity between the Quraish and the Ansar in his house at Medina

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of the Merits of the Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।