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सहीह मुस्लिम

नंबर 6455

नंबर 6455किताब 44, नंबर 284अरबी नंबरिंग 2526.02
حَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنْ عُمَارَةَ، عَنْ أَبِي زُرْعَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، ح وَحَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا الْمُغِيرَةُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْحِزَامِيُّ، عَنْ أَبِي الزِّنَادِ، عَنِ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ تَجِدُونَ النَّاسَ مَعَادِنَ ‏"‏ ‏.‏ بِمِثْلِ حَدِيثِ الزُّهْرِيِّ غَيْرَ أَنَّ فِي حَدِيثِ أَبِي زُرْعَةَ وَالأَعْرَجِ ‏"‏ تَجِدُونَ مِنْ خَيْرِ النَّاسِ فِي هَذَا الشَّأْنِ أَشَدَّهُمْ لَهُ كَرَاهِيَةً حَتَّى يَقَعَ فِيهِ ‏"‏ ‏.‏
This hadith has been transmitted through other chains of transmitters. The chain of of Abu Zur'a has a slight variation of wording

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of the Merits of the Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।