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सहीह मुस्लिम

नंबर 6441

नंबर 6441किताब 44, नंबर 270अरबी नंबरिंग 2521.01
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، وَمُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، قَالَ ابْنُ الْمُثَنَّى حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ سَعْدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ سَمِعْتُ أَبَا سَلَمَةَ، يُحَدِّثُ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ قَالَ ‏ "‏ أَسْلَمُ وَغِفَارُ وَمُزَيْنَةُ وَمَنْ كَانَ مِنْ جُهَيْنَةَ أَوْ جُهَيْنَةُ خَيْرٌ مِنْ بَنِي تَمِيمٍ وَبَنِي عَامِرٍ وَالْحَلِيفَيْنِ أَسَدٍ وَغَطَفَانَ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:The tribes of Ashja', Ghifar and Muzaina and from the tribe of Juhaina they are better than Banu Tamim, Banu Amir and the allies of Asad and Ghatfan

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of the Merits of the Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।