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सहीह मुस्लिम

नंबर 6420

नंबर 6420किताब 44, नंबर 249अरबी नंबरिंग 2510
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، وَمُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، - وَاللَّفْظُ لاِبْنِ الْمُثَنَّى - قَالاَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، أَخْبَرَنَا شُعْبَةُ، سَمِعْتُ قَتَادَةَ، يُحَدِّثُ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِنَّ الأَنْصَارَ كَرِشِي وَعَيْبَتِي وَإِنَّ النَّاسَ سَيَكْثُرُونَ وَيَقِلُّونَ فَاقْبَلُوا مِنْ مُحْسِنِهِمْ وَاعْفُوا عَنْ مُسِيئِهِمْ ‏"‏ ‏.‏
Anas b. Malik reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:The Ansar are my family and my trusted friends. and the people would increase in number whereas they (the Ansar) would become less and less, so appreciate the deeds of those from amongst them who do good and overlook their failings

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of the Merits of the Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।