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सहीह मुस्लिम

नंबर 6418

नंबर 6418किताब 44, नंबर 247अरबी नंबरिंग 2509.01
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، وَابْنُ، بَشَّارٍ جَمِيعًا عَنْ غُنْدَرٍ، قَالَ ابْنُ الْمُثَنَّى حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ، بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ هِشَامِ بْنِ زَيْدٍ، سَمِعْتُ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ، يَقُولُ جَاءَتِ امْرَأَةٌ مِنَ الأَنْصَارِ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم - قَالَ - فَخَلاَ بِهَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَقَالَ ‏ "‏ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ إِنَّكُمْ لأَحَبُّ النَّاسِ إِلَىَّ ‏"‏ ‏.‏ ثَلاَثَ مَرَّاتٍ ‏.‏
Anas b. Malik reported that a woman from the Ansar came to Allah's Messenger (ﷺ) and Allah's Messenger (ﷺ) stood aside with her and said:By Him in Whose Hand is my life, you are dearest to me amongst the people. He repeated it thrice

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of the Merits of the Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।