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सहीह मुस्लिम

नंबर 6416

नंबर 6416किताब 44, नंबर 245अरबी नंबरिंग 2507
حَدَّثَنِي أَبُو مَعْنٍ الرَّقَاشِيُّ، حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ يُونُسَ، حَدَّثَنَا عِكْرِمَةُ، - وَهُوَ ابْنُ عَمَّارٍ - حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ، - وَهُوَ ابْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ - أَنَّ أَنَسًا، حَدَّثَهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم اسْتَغْفَرَ لِلأَنْصَارِ - قَالَ - وَأَحْسِبُهُ قَالَ ‏ "‏ وَلِذَرَارِيِّ الأَنْصَارِ وَلِمَوَالِي الأَنْصَارِ ‏"‏ ‏.‏ لاَ أَشُكُّ فِيهِ ‏.‏
Anas reported that Allah's Messenger (ﷺ) sought forgiveness for the Ansar and he said:I think (he also sought forgiveness) for the children of the Ansar and the slaves and the freed men of the Ansar. I have no doubt about it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of the Merits of the Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।