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सहीह मुस्लिम

नंबर 6403

नंबर 6403किताब 44, नंबर 234अरबी नंबरिंग 2495
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا لَيْثٌ، ح وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رُمْحٍ، أَخْبَرَنَا اللَّيْثُ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، أَنَّ عَبْدًا، لِحَاطِبٍ جَاءَ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَشْكُو حَاطِبًا فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ لَيَدْخُلَنَّ حَاطِبٌ النَّارَ ‏.‏ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ كَذَبْتَ لاَ يَدْخُلُهَا فَإِنَّهُ شَهِدَ بَدْرًا وَالْحُدَيْبِيَةَ ‏"‏ ‏.‏
Jabir reported that a slave of Hatib came to Allah's Messenger (ﷺ) complaining against Hatib and said:Hatib will definitely go to Hell. (But) Allah's Messenger (ﷺ) said: You tell a lie; he would not get into that for he had taken part in Badr and in (the expedition of) Hudaibiya

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of the Merits of the Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।