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सहीह मुस्लिम

नंबर 6367

नंबर 6367किताब 44, नंबर 197अरबी नंबरिंग 2476.03
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، ح وَحَدَّثَنَا ابْنُ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا أَبِي ح، وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبَّادٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، ح وَحَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ، حَدَّثَنَا مَرْوَانُ، - يَعْنِي الْفَزَارِيَّ ح وَحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، كُلُّهُمْ عَنْ إِسْمَاعِيلَ، بِهَذَا الإِسْنَادِ وَقَالَ فِي حَدِيثِ مَرْوَانَ فَجَاءَ بَشِيرُ جَرِيرٍ أَبُو أَرْطَاةَ حُصَيْنُ بْنُ رَبِيعَةَ يُبَشِّرُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم ‏.‏
This hadith has been narrated on the authority of Ismail with different chains of transmitters and in the hadith transmitted on the authority of Marwan (the words are):"A person giving the glad tidings on behalf of Jarir came or Abu Husain b. Rabi`a came in order to give glad tidings to Allah's Apostle (ﷺ)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of the Merits of the Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।