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सहीह मुस्लिम

नंबर 6360

नंबर 6360किताब 44, नंबर 190अरबी नंबरिंग 2473.02
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ الْحَنْظَلِيُّ، أَخْبَرَنَا النَّضْرُ بْنُ شُمَيْلٍ، حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ، بْنُ الْمُغِيرَةِ حَدَّثَنَا حُمَيْدُ بْنُ هِلاَلٍ، بِهَذَا الإِسْنَادِ وَزَادَ بَعْدَ قَوْلِهِ قُلْتُ فَاكْفِنِي حَتَّى أَذْهَبَ فَأَنْظُرَ ‏.‏ قَالَ نَعَمْ وَكُنْ عَلَى حَذَرٍ مِنْ أَهْلِ مَكَّةَ فَإِنَّهُمْ قَدْ شَنِفُوا لَهُ وَتَجَهَّمُوا ‏.‏
This hadlth has been narrated on the authority of Humaid b. Hilal with the same chain of transmitters but with this addition:" As I came to Mecca, Unais said: (Well), go but be on your guard against the Meccans for they are his enemies and are annoyed with him

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of the Merits of the Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।