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सहीह मुस्लिम

नंबर 6356

नंबर 6356किताब 44, नंबर 186अरबी नंबरिंग 2471.03
حَدَّثَنَا عَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ، حَدَّثَنَا رَوْحُ بْنُ عُبَادَةَ، حَدَّثَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ، ح وَحَدَّثَنَا إِسْحَاقُ، بْنُ إِبْرَاهِيمَ أَخْبَرَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ، كِلاَهُمَا عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ الْمُنْكَدِرِ، عَنْ جَابِرٍ، ‏.‏ بِهَذَا الْحَدِيثِ غَيْرَ أَنَّ ابْنَ جُرَيْجٍ، لَيْسَ فِي حَدِيثِهِ ذِكْرُ الْمَلاَئِكَةِ وَبُكَاءُ الْبَاكِيَةِ ‏.‏
This hadith has been narrated on the authority of Jabir through another chain of transmitters, but with this difference that there is no mention of the Angels and the weeping of a female mourner

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of the Merits of the Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।