सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 6348

नंबर 6348किताब 44, नंबर 178अरबी नंबरिंग 2468.01
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، وَابْنُ، بَشَّارٍ قَالاَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، قَالَ سَمِعْتُ الْبَرَاءَ، يَقُولُ أُهْدِيَتْ لِرَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم حُلَّةُ حَرِيرٍ فَجَعَلَ أَصْحَابُهُ يَلْمُسُونَهَا وَيَعْجَبُونَ مِنْ لِينِهَا فَقَالَ ‏ "‏ أَتَعْجَبُونَ مِنْ لِينِ هَذِهِ لَمَنَادِيلُ سَعْدِ بْنِ مُعَاذٍ فِي الْجَنَّةِ خَيْرٌ مِنْهَا وَأَلْيَنُ ‏"‏ ‏.‏
Al-Bara' reported that a garment of silk was presented to Allah's Messenger (ﷺ). His Companions touched it and admired its softness; there- upon he said:Do you admire the softness of this (cloth)? The handkerchiefs of Sa'd b. Mu'adh in Paradise are better than this

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of the Merits of the Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।