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सहीह मुस्लिम

नंबर 6326

नंबर 6326किताब 44, नंबर 156अरबी नंबरिंग 2460.01
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ الْحَنْظَلِيُّ، وَمُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، - وَاللَّفْظُ لاِبْنِ رَافِعٍ - قَالَ إِسْحَاقُ أَخْبَرَنَا وَقَالَ ابْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ آدَمَ، حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي زَائِدَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنِ الأَسْوَدِ بْنِ يَزِيدَ، عَنْ أَبِي مُوسَى، قَالَ قَدِمْتُ أَنَا وَأَخِي، مِنَ الْيَمَنِ فَكُنَّا حِينًا وَمَا نُرَى ابْنَ مَسْعُودٍ وَأُمَّهُ إِلاَّ مِنْ أَهْلِ بَيْتِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم مِنْ كَثْرَةِ دُخُولِهِمْ وَلُزُومِهِمْ لَهُ ‏.‏
Abu Musa reported:When I and my brother came from Yemen we used to consider Ibn Mas'ud and his mother amongst the members of the household. of Allah's Messenger (ﷺ) because of their visiting them frequently and staying there for long (periods of) time

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of the Merits of the Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।