सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 6283

नंबर 6283किताब 44, नंबर 113अरबी नंबरिंग 2438.01
حَدَّثَنَا خَلَفُ بْنُ هِشَامٍ، وَأَبُو الرَّبِيعِ، جَمِيعًا عَنْ حَمَّادِ بْنِ زَيْدٍ، - وَاللَّفْظُ لأَبِي الرَّبِيعِ - حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، حَدَّثَنَا هِشَامٌ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّهَا قَالَتْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ أُرِيتُكِ فِي الْمَنَامِ ثَلاَثَ لَيَالٍ جَاءَنِي بِكِ الْمَلَكُ فِي سَرَقَةٍ مِنْ حَرِيرٍ فَيَقُولُ هَذِهِ امْرَأَتُكَ ‏.‏ فَأَكْشِفُ عَنْ وَجْهِكِ فَإِذَا أَنْتِ هِيَ فَأَقُولُ إِنْ يَكُ هَذَا مِنْ عِنْدِ اللَّهِ يُمْضِهِ ‏"‏ ‏.‏
A'isha reported Allah's Messenger (ﷺ) having said:I saw you in a dream for three nights when an angel brought you to me in a silk cloth and he said: Here is your wife, and when I removed (the cloth) from your face, lo, it was yourself, so I said: If this is from Allah, let Him carry it out

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of the Merits of the Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।