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सहीह मुस्लिम

नंबर 6256

नंबर 6256किताब 44, नंबर 86अरबी नंबरिंग 2421.01
حَدَّثَنِي أَحْمَدُ بْنُ حَنْبَلٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، حَدَّثَنِي عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ أَبِي يَزِيدَ، عَنْ نَافِعِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ قَالَ لِحَسَنٍ ‏ "‏ اللَّهُمَّ إِنِّي أُحِبُّهُ فَأَحِبَّهُ وَأَحْبِبْ مَنْ يُحِبُّهُ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying to Hasan:O Allah, behold, I love him. Thou too love him and love one who loves him

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of the Merits of the Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।