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सहीह मुस्लिम

नंबर 6233

नंबर 6233किताब 44, नंबर 63अरबी नंबरिंग 2411.01
حَدَّثَنَا مَنْصُورُ بْنُ أَبِي مُزَاحِمٍ، حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ، - يَعْنِي ابْنَ سَعْدٍ - عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ شَدَّادٍ، قَالَ سَمِعْتُ عَلِيًّا، يَقُولُ مَا جَمَعَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَبَوَيْهِ لأَحَدٍ غَيْرَ سَعْدِ بْنِ مَالِكٍ فَإِنَّهُ جَعَلَ يَقُولُ لَهُ يَوْمَ أُحُدٍ ‏ "‏ ارْمِ فِدَاكَ أَبِي وَأُمِّي ‏"‏ ‏.‏
Abdullah b. Shaddad reported that he heard `Ali saying:Allah's Messenger (ﷺ) did not gather his parents except in case of Sa`d b. Malik that he said to him on the Day of Uhud: Shoot an arrow, may my father and mother be taken as ransom for you

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of the Merits of the Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।