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सहीह मुस्लिम

नंबर 6203

नंबर 6203किताब 44, नंबर 33अरबी नंबरिंग 2397
حَدَّثَنَا هَارُونُ بْنُ مَعْرُوفٍ، حَدَّثَنَا بِهِ عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ مُحَمَّدٍ، أَخْبَرَنِي سُهَيْلٌ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ، جَاءَ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَعِنْدَهُ نِسْوَةٌ قَدْ رَفَعْنَ أَصْوَاتَهُنَّ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَلَمَّا اسْتَأْذَنَ عُمَرُ ابْتَدَرْنَ الْحِجَابَ ‏.‏ فَذَكَرَ نَحْوَ حَدِيثِ الزُّهْرِيِّ ‏.‏
Abu Huraira reported that Umar b. Khattab came to Allah's Messenger (ﷺ) while there were some women with him and they were raising their voices above the voice of Allah's Messenger (ﷺ) and when Umar sought permission to get into the house they went behind the curtain hurriedly. The rest of the hadith is the same

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of the Merits of the Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।