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सहीह मुस्लिम

नंबर 6185

नंबर 6185किताब 44, नंबर 16अरबी नंबरिंग 2388.03
وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبَّادٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، ح وَحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا أَبُو دَاوُدَ الْحَفَرِيُّ، عَنْ سُفْيَانَ، كِلاَهُمَا عَنْ أَبِي الزِّنَادِ، عَنِ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي، هُرَيْرَةَ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ بِمَعْنَى حَدِيثِ يُونُسَ عَنِ الزُّهْرِيِّ وَفِي حَدِيثِهِمَا ذِكْرُ الْبَقَرَةِ وَالشَّاةِ مَعًا وَقَالاَ فِي حَدِيثِهِمَا ‏ "‏ فَإِنِّي أُومِنُ بِهِ أَنَا وَأَبُو بَكْرٍ وَعُمَرُ ‏"‏ ‏.‏ وَمَا هُمَا ثَمَّ ‏.‏
This hadith has been transmitted on the authority of Zuhri, and there is a clear mention of the stories of ox and goat (and the words are):I believe in it and so do Abu Bakr and Umar, but they were not at that time present there

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of the Merits of the Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।