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सहीह मुस्लिम

नंबर 6107

नंबर 6107किताब 43, नंबर 165अरबी नंबरिंग 2354.03
وَحَدَّثَنِي عَبْدُ الْمَلِكِ بْنُ شُعَيْبِ بْنِ اللَّيْثِ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي، عَنْ جَدِّي، حَدَّثَنِي عُقَيْلٌ، ح وَحَدَّثَنَا عَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ، أَخْبَرَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ، ح وَحَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ، الرَّحْمَنِ الدَّارِمِيُّ أَخْبَرَنَا أَبُو الْيَمَانِ، أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ، كُلُّهُمْ عَنِ الزُّهْرِيِّ، بِهَذَا الإِسْنَادِ ‏.‏ وَفِي حَدِيثِ شُعَيْبٍ وَمَعْمَرٍ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ وَفِي حَدِيثِ عُقَيْلٍ قَالَ قُلْتُ لِلزُّهْرِيِّ وَمَا الْعَاقِبُ قَالَ الَّذِي لَيْسَ بَعْدَهُ نَبِيٌّ ‏.‏ وَفِي حَدِيثِ مَعْمَرٍ وَعُقَيْلٍ الْكَفَرَةَ ‏.‏ وَفِي حَدِيثِ شُعَيْبٍ الْكُفْرَ ‏.‏
This hadith has been transmitted on the authority of Ma'mar (and the words are):I said to Zuhri: What does (the word) al-'Aqib imply? He said: One after whom there is no Prophet, and in the hadith transmitted on the authority of Ma'mar and 'Uqail there is a slight variation of wording

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।