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सहीह मुस्लिम

नंबर 6061

नंबर 6061किताब 43, नंबर 119अरबी नंबरिंग 2335
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا مُعَاذُ بْنُ هِشَامٍ، حَدَّثَنَا أَبِي، عَنْ قَتَادَةَ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ حِطَّانَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ الرَّقَاشِيِّ، عَنْ عُبَادَةَ بْنِ الصَّامِتِ، قَالَ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم إِذَا أُنْزِلَ عَلَيْهِ الْوَحْىُ نَكَسَ رَأْسَهُ وَنَكَسَ أَصْحَابُهُ رُءُوسَهُمْ فَلَمَّا أُتْلِيَ عَنْهُ رَفَعَ رَأْسَهُ ‏.‏
Ubida b. Samit reported that when wahi descended upon Allah's Apostle (ﷺ), he lowered his head and so lowered his Companions their heads, and when (this state) was over, he raised his head

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।