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सहीह मुस्लिम

नंबर 6059

नंबर 6059किताब 43, नंबर 117अरबी नंबरिंग 2333.02
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، ح وَحَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، وَابْنُ، بِشْرٍ جَمِيعًا عَنْ هِشَامٍ، ح وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ، - وَاللَّفْظُ لَهُ - حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ، حَدَّثَنَا هِشَامٌ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّ الْحَارِثَ بْنَ هِشَامٍ، سَأَلَ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَيْفَ يَأْتِيكَ الْوَحْىُ فَقَالَ ‏ "‏ أَحْيَانًا يَأْتِينِي فِي مِثْلِ صَلْصَلَةِ الْجَرَسِ وَهُوَ أَشَدُّهُ عَلَىَّ ثُمَّ يَفْصِمُ عَنِّي وَقَدْ وَعَيْتُهُ وَأَحْيَانًا مَلَكٌ فِي مِثْلِ صُورَةِ الرَّجُلِ فَأَعِي مَا يَقُولُ ‏"‏ ‏.‏
A'isha reported that Harith b. Hisham asked Allah's Apostle (ﷺ):How does the the wahi (inspiration) come to you? He said: At times it comes to me like the ringing of a bell and that is most severe for me and when it is over I retain that (what I had received in the form of wahi), and at times an Angel in the form of a human being comes to me (and speaks) and I retain whatever he speaks

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।