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सहीह मुस्लिम

नंबर 6055

नंबर 6055किताब 43, नंबर 113अरबी नंबरिंग 2331.01
حَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا هَاشِمٌ، - يَعْنِي ابْنَ الْقَاسِمِ - عَنْ سُلَيْمَانَ، عَنْ ثَابِتٍ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ دَخَلَ عَلَيْنَا النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ عِنْدَنَا فَعَرِقَ وَجَاءَتْ أُمِّي بِقَارُورَةٍ فَجَعَلَتْ تَسْلُتُ الْعَرَقَ فِيهَا فَاسْتَيْقَظَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ ‏ "‏ يَا أُمَّ سُلَيْمٍ مَا هَذَا الَّذِي تَصْنَعِينَ ‏"‏ ‏.‏ قَالَتْ هَذَا عَرَقُكَ نَجْعَلُهُ فِي طِيبِنَا وَهُوَ مِنْ أَطْيَبِ الطِّيبِ ‏.‏
अनस बिन मालिक- रज़ियल्लाहु अन्हु- से वर्णित है वह कहते हैं कि नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- हमारे पास आए तथा दोपहर के समय हमारे यहाँ ही सो गए और आप के शरीर से पसीना निकलने लगा तो मेरी माता शीशी लेकर आईं तथा उस पसीने को शीशी मे जमा करने लगीं, नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- जागे तो फ़रमायाः हे उम्मे सुलैम! यह क्या कर रही हो? तो उन्होंने जवाब दियाः यह आप का पसीना है जो हम अपने इत्र में मिलाते हैं, और यह सबसे अच्छे इत्र में से एक है।

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 43 · The Book of Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।