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सहीह मुस्लिम

नंबर 6053

नंबर 6053किताब 43, नंबर 111अरबी नंबरिंग 2330.01
وَحَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا جَعْفَرُ بْنُ سُلَيْمَانَ، عَنْ ثَابِتٍ، عَنْ أَنَسٍ، ح وَحَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، - وَاللَّفْظُ لَهُ - حَدَّثَنَا هَاشِمٌ، - يَعْنِي ابْنَ الْقَاسِمِ - حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ، - وَهُوَ ابْنُ الْمُغِيرَةِ - عَنْ ثَابِتٍ، قَالَ أَنَسٌ مَا شَمِمْتُ عَنْبَرًا قَطُّ وَلاَ مِسْكًا وَلاَ شَيْئًا أَطْيَبَ مِنْ رِيحِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَلاَ مَسِسْتُ شَيْئًا قَطُّ دِيبَاجًا وَلاَ حَرِيرًا أَلْيَنَ مَسًّا مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏.‏
Anas reported:I never smelt ambergris or musk as fragrant as the fragrance of the body of Allah's Messenger (ﷺ) and I never touched brocade or silk and found it as soft as the body of Allah's Messenger (ﷺ)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।