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सहीह मुस्लिम

नंबर 6050

नंबर 6050किताब 43, नंबर 108अरबी नंबरिंग 2328.01
حَدَّثَنَاهُ أَبُو كُرَيْبٍ، حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، عَنْ هِشَامٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ مَا ضَرَبَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم شَيْئًا قَطُّ بِيَدِهِ وَلاَ امْرَأَةً وَلاَ خَادِمًا إِلاَّ أَنْ يُجَاهِدَ فِي سَبِيلِ اللَّهِ وَمَا نِيلَ مِنْهُ شَىْءٌ قَطُّ فَيَنْتَقِمَ مِنْ صَاحِبِهِ إِلاَّ أَنْ يُنْتَهَكَ شَىْءٌ مِنْ مَحَارِمِ اللَّهِ فَيَنْتَقِمَ لِلَّهِ عَزَّ وَجَلَّ ‏.‏
A'isha reported that Allah's Messenger (ﷺ) never beat anyone with his hand, neither a woman nor a servant, but only, in the case when he had been fighting in the cause of Allah and he never took revenge for anything unless the things made inviolable by Allah were made violable; he then took revenge for Allah, the Exalted and Glorious

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।