حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا أَبُو النَّضْرِ، حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ، عَنْ ثَابِتٍ، عَنْ أَنَسٍ، قَالَ لَقَدْ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَالْحَلاَّقُ يَحْلِقُهُ وَأَطَافَ بِهِ أَصْحَابُهُ فَمَا يُرِيدُونَ أَنْ تَقَعَ شَعْرَةٌ إِلاَّ فِي يَدِ رَجُلٍ .
Anas reported:I saw when the Messenger of Allah (ﷺ) got his hair cut by the barber, his Companions came round him and they eagerly wanted that no hair should fall but in the hand of a person
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।