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सहीह मुस्लिम

नंबर 6024

नंबर 6024किताब 43, नंबर 82अरबी नंबरिंग 2314.02
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ حَاتِمِ بْنِ مَيْمُونٍ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَكْرٍ، أَخْبَرَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ، أَخْبَرَنِي عَمْرُو بْنُ دِينَارٍ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَلِيٍّ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ وَأَخْبَرَنِي مُحَمَّدُ بْنُ الْمُنْكَدِرِ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ لَمَّا مَاتَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم جَاءَ أَبَا بَكْرٍ مَالٌ مِنْ قِبَلِ الْعَلاَءِ بْنِ الْحَضْرَمِيِّ فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ مَنْ كَانَ لَهُ عَلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم دَيْنٌ أَوْ كَانَتْ لَهُ قِبَلَهُ عِدَةٌ فَلْيَأْتِنَا ‏.‏ بِنَحْوِ حَدِيثِ ابْنِ عُيَيْنَةَ ‏.‏
Jabir b. 'Abdullah reported:When Allah's Apostle (ﷺ) died, there came to Abfi Bakr wealth from al-'Ala' b. al-Hadrami. Abu Bakr said: He to whom Allah's Apostle (ﷺ) owed any debt or held out any promise should come to us; the rest of the hadith is the same

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।