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सहीह मुस्लिम

नंबर 6014

नंबर 6014किताब 43, नंबर 73अरबी नंबरिंग 2309.04
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَابْنُ، نُمَيْرٍ قَالاَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ، حَدَّثَنَا زَكَرِيَّاءُ، حَدَّثَنِي سَعِيدٌ، - وَهُوَ ابْنُ أَبِي بُرْدَةَ - عَنْ أَنَسٍ، قَالَ خَدَمْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم تِسْعَ سِنِينَ فَمَا أَعْلَمُهُ قَالَ لِي قَطُّ لِمَ فَعَلْتَ كَذَا وَكَذَا وَلاَ عَابَ عَلَىَّ شَيْئًا قَطُّ ‏.‏
Anas reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:I served the Messenger of Allah (ﷺ) for nine years, and I do not know (of any instance) when he said to me: Why you have done this and that, and he never found fault with me in anything

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।