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सहीह मुस्लिम

नंबर 5952

नंबर 5952किताब 43, नंबर 15अरबी नंबरिंग 843.05
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَفَّانُ، حَدَّثَنَا أَبَانُ بْنُ يَزِيدَ، حَدَّثَنَا يَحْيَى، بْنُ أَبِي كَثِيرٍ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ أَقْبَلْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم حَتَّى إِذَا كُنَّا بِذَاتِ الرِّقَاعِ ‏.‏ بِمَعْنَى حَدِيثِ الزُّهْرِيِّ وَلَمْ يَذْكُرْ ثُمَّ لَمْ يَعْرِضْ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏.‏
Jabir b. 'Abdullah reported:We went along with Allah's Messenger (ﷺ) and as we reached the place Dhat-ur-Riqa'; the rest of the hadith is the same, but there is no mention of the word that Allah's Messenger (ﷺ) did not harm him

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।