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सहीह मुस्लिम

नंबर 5895

नंबर 5895किताब 41, नंबर 10अरबी नंबरिंग 2259
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ الثَّقَفِيُّ، حَدَّثَنَا لَيْثٌ، عَنِ ابْنِ الْهَادِ، عَنْ يُحَنِّسَ، مَوْلَى مُصْعَبِ بْنِ الزُّبَيْرِ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ، قَالَ بَيْنَا نَحْنُ نَسِيرُ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِالْعَرْجِ إِذْ عَرَضَ شَاعِرٌ يُنْشِدُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ خُذُوا الشَّيْطَانَ أَوْ أَمْسِكُوا الشَّيْطَانَ لأَنْ يَمْتَلِئَ جَوْفُ رَجُلٍ قَيْحًا خَيْرٌ لَهُ مِنْ أَنْ يَمْتَلِئَ شِعْرًا ‏"‏ ‏.‏
Abu Sa`id Al-Khudri reported:We were going with Allah's Messenger (ﷺ). As we reached the place (known as) `Arj there met (us) a poet who had been reciting poetry. Thereupon Allah's Messenger (ﷺ) said: Catch the satan or detain the satan, for filling the belly of a man with pus is better than stuffing his brain with poetry

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 41 · The Book of Poetry

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।