सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 5893

नंबर 5893किताब 41, नंबर 8अरबी नंबरिंग 2257
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا حَفْصٌ، وَأَبُو مُعَاوِيَةَ ح وَحَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، كِلاَهُمَا عَنِ الأَعْمَشِ، ح وَحَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ الأَشَجُّ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، حَدَّثَنَا الأَعْمَشُ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ لأَنْ يَمْتَلِئَ جَوْفُ الرَّجُلِ قَيْحًا يَرِيهِ خَيْرٌ مِنْ أَنْ يَمْتَلِئَ شِعْرًا ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو بَكْرٍ إِلاَّ أَنَّ حَفْصًا لَمْ يَقُلْ ‏"‏ يَرِيهِ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:It is better for a man's belly to be stuffed with pus which corrodes it than to stuff (one's mind) with frivolous poetry. Abu Bakr has reported it with a slight variation of wording

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 41 · The Book of Poetry

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।