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सहीह मुस्लिम

नंबर 995

नंबर 995किताब 4, नंबर 157अरबी नंबरिंग 442.08
حَدَّثَنَا هَارُونُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يَزِيدَ الْمُقْرِئُ، حَدَّثَنَا سَعِيدٌ، - يَعْنِي ابْنَ أَبِي أَيُّوبَ - حَدَّثَنَا كَعْبُ بْنُ عَلْقَمَةَ، عَنْ بِلاَلِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لاَ تَمْنَعُوا النِّسَاءَ حُظُوظَهُنَّ مِنَ الْمَسَاجِدِ إِذَا اسْتَأْذَنُوكُمْ ‏"‏ فَقَالَ بِلاَلٌ وَاللَّهِ لَنَمْنَعُهُنَّ ‏.‏ فَقَالَ لَهُ عَبْدُ اللَّهِ أَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَتَقُولُ أَنْتَ لَنَمْنَعُهُنَّ ‏.‏
Ibn Umar reported:The Messenger of Allah (ﷺ) said: Do not deprive women of their share of the mosques, when they seek permission from you. Bilal said: By Allah, we would certainly prevent them. 'Abdullah said: I say that the Messenger of Allah (ﷺ) said it and you say: We would certainly prevent them

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।