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सहीह मुस्लिम

नंबर 992

नंबर 992किताब 4, नंबर 154अरबी नंबरिंग 442.05
حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ مُجَاهِدٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لاَ تَمْنَعُوا النِّسَاءَ مِنَ الْخُرُوجِ إِلَى الْمَسَاجِدِ بِاللَّيْلِ ‏"‏ ‏.‏ فَقَالَ ابْنٌ لِعَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ لاَ نَدَعُهُنَّ يَخْرُجْنَ فَيَتَّخِذْنَهُ دَغَلاً ‏.‏ قَالَ فَزَبَرَهُ ابْنُ عُمَرَ وَقَالَ أَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَتَقُولُ لاَ نَدَعُهُنَّ ‏.‏
Ibn 'Umar reported:The Messenger of Allah (ﷺ) said: Do not prevent women from going to the mosque at night. A boy said to 'Abdullah b. Umar: We would never let them go out, that they may not be caught in evil. He (the narrator) said: Ibn Umar reprimanded him and said.. I am saying that the Messenger of Allah (ﷺ) said this, but you say: We would not allow

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।