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सहीह मुस्लिम

नंबर 988

नंबर 988किताब 4, नंबर 150अरबी नंबरिंग 442.01
حَدَّثَنِي عَمْرٌو النَّاقِدُ، وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، جَمِيعًا عَنِ ابْنِ عُيَيْنَةَ، - قَالَ زُهَيْرٌ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، - عَنِ الزُّهْرِيِّ، سَمِعَ سَالِمًا، يُحَدِّثُ عَنْ أَبِيهِ، يَبْلُغُ بِهِ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِذَا اسْتَأْذَنَتْ أَحَدَكُمُ امْرَأَتُهُ إِلَى الْمَسْجِدِ فَلاَ يَمْنَعْهَا ‏"‏ ‏.‏
Salim narrated it from his father ('Abdullah b. Umar) that the Messenger of Allah (ﷺ) said:When women ask permission for going to the mosque, do not prevent them

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।