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सहीह मुस्लिम

नंबर 984

नंबर 984किताब 4, नंबर 146अरबी नंबरिंग 439
حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ دِينَارٍ، وَمُحَمَّدُ بْنُ حَرْبٍ الْوَاسِطِيُّ، قَالاَ حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ الْهَيْثَمِ أَبُو قَطَنٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ خِلاَسٍ، عَنْ أَبِي رَافِعٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏"‏ لَوْ تَعْلَمُونَ - أَوْ يَعْلَمُونَ - مَا فِي الصَّفِّ الْمُقَدَّمِ لَكَانَتْ قُرْعَةً ‏"‏ ‏.‏ وَقَالَ ابْنُ حَرْبٍ ‏"‏ الصَّفِّ الأَوَّلِ مَا كَانَتْ إِلاَّ قُرْعَةً ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported:The Messenger of Allah (ﷺ) said: If you were to know, or if they were to know, what (excellence) lies in the first rows, there would have been drawing of lots (for filling them) ; and Ibn Harb said: For (occupying) the first row there would have been drawing of lots

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।