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सहीह मुस्लिम

नंबर 977

नंबर 977किताब 4, नंबर 139अरबी नंबरिंग 435
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ، عَنْ هَمَّامِ بْنِ مُنَبِّهٍ، قَالَ هَذَا مَا حَدَّثَنَا أَبُو هُرَيْرَةَ، عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَذَكَرَ أَحَادِيثَ مِنْهَا وَقَالَ ‏ "‏ أَقِيمُوا الصَّفَّ فِي الصَّلاَةِ فَإِنَّ إِقَامَةَ الصَّفِّ مِنْ حُسْنِ الصَّلاَةِ ‏"‏ ‏.‏
Hammam b. Munabbih reported:This is what was transmitted to us by Abu Huraira from the Messenger of Allah (ﷺ) and, while making a mention of a few ahadith, said: (The Messengerof Allah directed us thus): Establish rows in prayer, for the making of a row (straight) is one of the merits of prayer

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।