सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 967

नंबर 967किताब 4, नंबर 129अरबी नंबरिंग 429
حَدَّثَنِي أَبُو الطَّاهِرِ، وَعَمْرُو بْنُ سَوَّادٍ، قَالاَ أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ، حَدَّثَنِي اللَّيْثُ بْنُ سَعْدٍ، عَنْ جَعْفَرِ بْنِ رَبِيعَةَ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لَيَنْتَهِيَنَّ أَقْوَامٌ عَنْ رَفْعِهِمْ أَبْصَارَهُمْ عِنْدَ الدُّعَاءِ فِي الصَّلاَةِ إِلَى السَّمَاءِ أَوْ لَتُخْطَفَنَّ أَبْصَارُهُمْ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported:People should avoid lifting their eyes towards the sky while supplicating in prayer, otherwise their eyes would be snatched away

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।