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सहीह मुस्लिम

नंबर 965

नंबर 965किताब 4, नंबर 127अरबी नंबरिंग 427.03
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ سَلاَّمٍ الْجُمَحِيُّ، وَعَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ الرَّبِيعِ بْنِ مُسْلِمٍ، جَمِيعًا عَنِ الرَّبِيعِ بْنِ مُسْلِمٍ، ح وَحَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُعَاذٍ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، ح وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ حَمَّادِ بْنِ سَلَمَةَ، كُلُّهُمْ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ زِيَادٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بِهَذَا غَيْرَ أَنَّ فِي حَدِيثِ الرَّبِيعِ بْنِ مُسْلِمٍ ‏ "‏ أَنْ يَجْعَلَ اللَّهُ وَجْهَهُ وَجْهَ حِمَارٍ ‏"‏ ‏.‏
This hadith has been narrated by Abu Huraira by another chain of transmitters except for the words narrated by Rabi' b. Muslim:" Allah may make his face like the face of an ass

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।