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सहीह मुस्लिम

नंबर 957

नंबर 957किताब 4, नंबर 119अरबी नंबरिंग 423
حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلاَءِ الْهَمْدَانِيُّ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، عَنِ الْوَلِيدِ، - يَعْنِي ابْنَ كَثِيرٍ - حَدَّثَنِي سَعِيدُ بْنُ أَبِي سَعِيدٍ الْمَقْبُرِيُّ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ صَلَّى بِنَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَوْمًا ثُمَّ انْصَرَفَ فَقَالَ ‏ "‏ يَا فُلاَنُ أَلاَ تُحْسِنُ صَلاَتَكَ أَلاَ يَنْظُرُ الْمُصَلِّي إِذَا صَلَّى كَيْفَ يُصَلِّي فَإِنَّمَا يُصَلِّي لِنَفْسِهِ إِنِّي وَاللَّهِ لأُبْصِرُ مَنْ وَرَائِي كَمَا أُبْصِرُ مَنْ بَيْنَ يَدَىَّ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported:One day the Messenger of Allah (ﷺ) led the prayer. Then turning (towards his Companions) he said: O you man, why don't you say your prayer well? Does the observer of prayer not see how he is performing the prayer, for he performs it for himself? By Allah, I see behind me as I see in front of me

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।