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सहीह मुस्लिम

नंबर 953

नंबर 953किताब 4, नंबर 115अरबी नंबरिंग 274.13
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، وَالْحُلْوَانِيُّ، قَالاَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، حَدَّثَنِي ابْنُ شِهَابٍ، عَنْ إِسْمَاعِيلَ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ سَعْدٍ، عَنْ حَمْزَةَ بْنِ الْمُغِيرَةِ، نَحْوَ حَدِيثِ عَبَّادٍ قَالَ الْمُغِيرَةُ فَأَرَدْتُ تَأْخِيرَ عَبْدِ الرَّحْمَنِ فَقَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ دَعْهُ ‏"‏ ‏.‏
This hadith is narrated by Hamza b. Mughira by another chain of trans- mitters (but with the addition of these words):I made up my mind to hold Abd al-Rahman b. 'Auf back, but the Messenger of Allah (ﷺ) said: Leave him

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।