सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 950

नंबर 950किताब 4, नंबर 112अरबी नंबरिंग 421.02
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ، - يَعْنِي ابْنَ أَبِي حَازِمٍ - وَقَالَ قُتَيْبَةُ حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ، - وَهُوَ ابْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْقَارِيُّ - كِلاَهُمَا عَنْ أَبِي حَازِمٍ، عَنْ سَهْلِ بْنِ سَعْدٍ، بِمِثْلِ حَدِيثِ مَالِكٍ ‏.‏ وَفِي حَدِيثِهِمَا فَرَفَعَ أَبُو بَكْرٍ يَدَيْهِ فَحَمِدَ اللَّهَ وَرَجَعَ الْقَهْقَرَى وَرَاءَهُ حَتَّى قَامَ فِي الصَّفِّ ‏.‏
This hadith is transmitted by Sahl b. Sa'd in the same way as narrated by Malik, with the exception of these words:" Abu Bakr lifted his hands and praised Allah and retraced his (steps) till he stood in a row

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।